प्रेषक : देवदास …
हैल्लो दोस्तों, मेरी वो पड़ोसन भाभी अपने मायके गयी हुई थी और उनके बच्चों के पेपर होने की वजह से कोई भी बच्चा उनके साथ नहीं गया था और अब मेरे लिए तो यह बहुत अच्छी ख़ुशी की खबर थी।
फिर दो दिनों के बाद भाभी का मेरे पास फोन आया और उन्होंने मुझसे कहा कि गाँव में मेला लगा है अगर तुम्हारी मेला देखने की इच्छा हो तो चले आओ। दोस्तों मेला देखना तो बस एक बहाना था, मुझे अपनी भाभी से मिलने जाना था और में उनके बुलाने से बहुत खुश था, इसलिए में तुरंत तैयार हो गया और दूसरे ही दिन से में ट्रेन से अपनी भाभी के गाँव चल दिया। फिर में करीब दोपहर को 12 बजे में उनके घर पर पहुँच गया और भाभी मुझे अपने सामने देखकर बहुत खुश हुई, वो लगातार शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी। दोस्तों उनके घरवाले भी मुझसे बहुत अच्छी तरह से परिचित थे, इसलिए वो भी मुझसे प्यार करते थे, अब वो लोग भी मुझे देखकर बहुत खुश थे और मुझे अंदर बुलाकर बैठाने के बाद मेरे खाने पीने की वो लोग बंदोबस्त करने लगे। अब में अपने हाथ मुहं को धोकर कपड़े बडालकर पलंग पर लेटकर आराम करने लगा था, क्योंकि चार पांच घंटे के उस सफर से मुझे थकावट भी बहुत महसूस हो रही थी। फिर इतने में भाभी मेरे पास आ गई और में उस समय उस कमरे में बिल्कुल अकेला था और उनके सभी घर वाले अपने कामो में लगे हुए थे।
फिर मैंने झट से सही मौका देखकर उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया और अब में उसके एकदम टाईट बड़े आकार के बूब्स को मसलने लगा था। अब भाभी सिसकियाँ लेने लगी थी और उसके बाद मैंने उसकी साड़ी के ऊपर से ही अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और सहलाना शुरू किया, वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, लेकिन अभी चुदाई नहीं करवाना चाहती थी। फिर वो दस मिनट के बाद मुझसे छूटते हुए बोली अभी नहीं यह सब हम सही मौका देखकर बाद में भी कर सकते है और फिर वो चली गयी। फिर दोपहर का खाना खाने के बाद में आराम से सो गया और जब मेरी आँख खुली तब मैंने देखा कि भाभी एक लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनकर बिल्कुल दुल्हन की तरह सज संवरकर मेरे पास खड़ी हुई है। अब मैंने उनको अपने सामने उस तरह से देखकर सोचा कि कहीं यह कोई सपना तो नहीं है। अब भाभी मुझे नींद से जगा रही थी और मेरे उठने के बाद उसने मुझसे कहा कि अब उठो हमें मेला घूमने जाना है और यह बात मुझसे कहते हुए उसने ज़ोर से मेरे लंड को दबा दिया। फिर में उस दर्द की वजह से चीख उठा और उसी समय उसको अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा कि भाभी तुम कसम से आज बहुत कयामत लग रही हो, प्लीज अभी एक बार दो ना, लेकिन वो भाग खड़ी हुई।
फिर में उठकर हाथ मुहं धोकर मेले में जाने के लिए तैयार होने लगा और फिर तैयार होकर में अपनी भाभी के साथ मेला घूमने चला गया। फिर हमे रास्ते में पास के गाँव की कई लड़कियाँ मिली उन सभी को भाभी ने मुझे अपना पति बताया, हम दोनों हंसी खुशी खेतों के रास्ते मेला देखने जा रहे थे। कुछ देर लगातार चलते हुए में अब थक सा गया था। अब मैंने भाभी को कहा कि भाभी हम थोड़ी देर कहीं बैठ जाते है, क्योंकि अब मुझसे थोड़ा भी आगे नहीं चला जाएगा, में बहुत थक चुका हूँ और मुझे इतना पैदल चलने की आदत जो नहीं है। अब भाभी ने मेरी बात को सुनकर मुझसे कहा कि वो सामने वाला खेत हमारा है और वहाँ पर एक छोटी सी झोपड़ी बनी है जहाँ पर मेरे पिताजी रात के समय कभी कभी आकर सोते है, चलो हम वहीं पर चलकर कुछ देर बैठते है, उसके बाद आगे चलने के बारे में सोचेगे। अब हम दोनों कुछ देर चलने के बाद उस झोपड़ी में पहुंच गये, मैंने देखा कि वहाँ पर एक खाट बिछी हुई थी और में अंदर जाते ही तुरंत उस खाट पर बैठ गया और भाभी भी मेरे पास ही बैठ गयी। फिर कुछ देर बाद मैंने धीरे से अपना एक हाथ भाभी के बूब्स पर रख दिया और फिर में धीरे धीरे दोनों बूब्स को दबाने लगा था।
फिर कुछ देर बाद अपने होंठो को उसकी पीठ पर रखकर में पीठ को चूमने लगा था और धीरे धीरे उसके बालों को भी सहलाने लगा था। दोस्तों मेरे यह सब करने की वजह से भाभी अब बड़ी गरम हो चुकी थी और फिर धीरे से मैंने अपना एक हाथ उसके ब्लाउज के अंदर डाल दिया और उसके टाइट बूब्स को दबाने लगा था। अब भाभी सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी कि नहीं देव प्लीज अब और मत तुम मुझे तड़पाओ, क्यों तुम मुझे इतना परेशान कर रहे हो। फिर मैंने उसको अपनी तरफ खींच लिया और में उसके होंठो को चूसने लगा। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू उतार दिया और ब्लाउज के हुक को भी खोलने लगा। अब ब्लाउज के हुक को भी खोलने के बाद में उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा मसलने लगा था। ऐसा करने में मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। अब मैंने उसके ब्लाउज और ब्रा दोनों को ही उतार दिया था जिसकी वजह से अब उसके बड़े आकार के एकदम टाइट बूब्स मेरे सामने बिल्कुल नंगए थे और मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था। अब मुझसे भी ज्यादा बर्दाश्त करना बड़ा ही मुश्किल हो रहा था, क्योंकि में पूरी तरह से जोश में आ चुका था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
फिर मैंने भी तुरंत जोश में आकर अपने सारे कपड़े उतार दिए और भाभी को अपनी बाहों में भरकर खाट पर एकदम सीधा लेटा दिया, उसके बाद में उसकी साड़ी को ऊपर उठाकर पेट तक ले गया। अब मैंने देखा कि भाभी ने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी, इसलिए अब मेरे सामने उसकी प्यारी सी चुदक्कड़ चुदाई के लिए प्यासी चूत सामने आ चुकी थी। अब मैंने अपनी एक उंगली को भाभी की चूत के छेद में डालकर चूत की गहराईयों को नापना शुरू किया और में हल्के हल्के चूत के दाने को सहलाने भी लगा था। अब मेरे ऐसा करने की वजह से भाभी के मुहं से जोश भरी सिसकियों की आवाज निकलने लगी थी। फिर में लगातार कुछ देर तक अपनी ऊँगली को अपनी गरम भाभी की चूत के अंदर बाहर करता रहा और अब उसकी चूत में वैसे ही लगातार अपनी उंगली को अंदर बाहर करने की वजह से कुछ देर बाद भाभी झड़ गयी। अब उसकी चूत से निकले उस चिकने गरम पानी से मेरा हाथ और भाभी की चूत पूरी तरह से भीगकर एकदम चिकनी हो चुकी थी। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहं से सटाकर एक ज़ोर का झटका मार दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड अब भाभी की चिकनी चूत में घुस चुका था।
अब भाभी जोश में आकर दर्द से बोली ऊऊऊओह आआह्ह्हहह देव ऊओह्ह्ह देव ऊफ्फ्फ्फ़ और ज़ोर से धक्के देकर चोदो ना और तुम आज इस सुहाने मौसम में मेरी इस चूत का सारा पानी बाहर निकाल दो। अब में भी जोश में आकर बहुत जमकर धक्के देते हुए भाभी की चूत के अंदर अपना लंड डालता चला गया और अब में पूरी मस्ती में आकर भाभी को लगातार तेज धक्के देकर चोद रहा था और भाभी भी मेरे साथ पूरा मज़ा लेकर मुझसे अपनी चुदाई करवा रही थी। दोस्तों मेरे हर एक धक्के पर वो भी अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे हर एक धक्के का साथ दे रही थी और करीब एक घंटे तक रुक रुककर हम दोनों ने चुदाई का वो खेल बड़े मज़े से खेला, हमारा वो मज़ा मस्ती वैसे ही चलता रहा और फिर आखरी में मैंने अपना पूरा वीर्य बड़े तेज धक्कों के साथ चूत की गहराईयों में डाल दिया। अब में थककर उनके ऊपर ही लेट गया। दोस्तों उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपककर कुछ देर लेट गये और जब हमें इस बात का एहसास हुआ कि अब बाहर अंधेरा हो चुका है। फिर हम दोनों उठे और मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी ने भी कपड़े पहन लिए और फिर हम दोनों वहां से मेले ना जाकर सीधे घर की तरफ चल दिए।
अब हम घर पर आकर कुछ देर आराम करने के बाद खाना खाकर अपने अपने बिस्तर में लेट गए और देर रात को घर के सभी सदस्यों के सो जाने के बाद हम दोनों सही मौका देखकर उठे और दोबारा से पास वाले कमरे में लगे दोबारा वही खेल खेलने लगे। दोस्तों उस रात को भी मैंने अपनी भाभी को जमकर चोदा, मैंने उसकी चूत में अपने लंड को डालकर उसकी जमकर चुदाई के मज़े लिए और बहुत जमकर चुदाई करके, हम एक दूसरे से वैसे ही लिपटे पड़े रहे। दोस्तों हमारा यह खेल पूरी रात चला और मैंने अपनी हॉट सेक्सी भाभी को हर तरह से चुदाई के मज़े दिए जिसकी वजह से वो मेरी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थी और जब सुबह होने लगी तो हम दोनों वापस अपनी अपनी जगह पर आकर वापस सो गए।
दोस्तों पूरी रात चली हमारी उस चुदाई के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चला, मैंने बहुत खुश होकर चुदाई के मस्त मज़े लिए ।।
धन्यवाद …