प्रेषक : गुमनाम
“समीरा मेडम का लंड 1” से आगे कि कहानी . . . समीरा जब बाहर निकली तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, कोई उसे देख कर यह नहीं कह सकता था कि उसकी उम्र 47 के आसपास है और व तीन बच्चोँ की मां है । सेक्स उसे अच्छा लगता था या यूं कहें कि सेक्स उसकी हॉबी थी
। पर एक अजीब किस्म के सेक्स उसकी हॉबी बन चुकी थी । शीमेल सेक्स ! अपने पति विजय के साथ विदेश की दौरे पर कोई बार उन लगोँ ने शीमेल के साथ मिल कर सेक्स का आनंद भी उठाया था । पर समीरा को लेसबियन सेक्स मेँ भी बहुत रुचि थी । हालांकि उसका और विजय का सेक्स जीवन खासा अच्छा नहीँ था ।
उनके तीन बच्चे भी थे, एक लडका और दो लडकी, तीनोँ बडे हो चुके थे और लंदन में रहते थे । रुपये पैसे की कमी नहीं थी, पति विजय माल्य देश के नामी रईस आदमियोँ मेँ गिने जाते हैँ । जिनकी कई फैक्ट्रियां थी और कम्पनियां थी, देश भर में बिजनेस फैला हुआ था।
इन सब के बावजूद विजय और समीरा अपने तरीके से जिंदगी गुजार लेती हैँ । कोई किसी के निजी जिंदगी मेँ दखल नहीँ रखते । जिस्मानी तौर पर पति से अलग होने पर समीरा की लेसबियन सेक्स की आदत बढ गई ।
उम्र बढने के साथ उसकी ये आदत बढती चली गई । और अपनी लेसबियन मनसुबोँ को और कामयाब बनाने के लिए समीरा ने शीमेल बनने का निश्चय कर लिया । फिर उसने फ्रांस के एक प्रसिद्ध जेंडर थेरपिष्ट की मदद से शरीर को बदल डाली । उसकी शरीर से बुर और बच्चेदानी को हटाकर एक बडा सा लंड ट्रांसप्लांट किया गया और साथ मेँ व दो साल खुराक लेती रही ताकि लंड पुरी मर्द की तरह काम करने लगे । सिर्फ लंड को छोड कर पुरी शरीर पहले जैसा औरत का ही रहा ।
उसके बाद समीरा ने ढलती उम्र मेँ अपनी बदली हुई शरीर से भरपुर सेक्स का मजा उठाने लगी । माल्य साहब को भी अपनी पत्नी की बदली हुई सेक्स से कोई ऐतराज नहीँ था । सारे बच्चे भी अब दुर रहते है । व बहुत दिनोँ से अपनी जिद्दी पत्नी को आजाद कर दिया था । अब समीरा की निजी मामले मेँ दखल नहीँ देते । फिर भी दोनोँ एक अच्छे पति-पत्नी की तरह ही रहते हैँ ।
मुम्बई की डिफेन्स कॉलोनी में माल्य साहब का पुरा परिवार रहता था। आलीशान बंगला कई नौकर-चाकर रहते थे मगर इन सबमें मालती सबसे ज्यादा चहेती नौकर थी । समीरा नाश्ते के लिए आकर मेज़ पर बैठी और नाश्ता करने लगी । तभी सामने समीरा की एक और नौकरानी आई जो मालती की बहू थी और उसके सामने रखे ग्लास में जूस डालने लगी ।
उसका नाम शीतल था । देखने मेँ थोडी सी मोटी थी पर मस्त लौँडिया थी । उसकी उम्र 25 का आसपास ही थी । अभी तक कोई बच्चा नहीँ हुआ था । व रोज अपनी सास मालती के साथ काम पर आती थी ।
समीरा ने शीतल को भी नहीँ छोडी थी । जब नाश्ता करते समय शीतल की मटकती गांड देखी तो समीरा से रही नहीँ गयी । समीरा उठ कर शीतल की भारी गांड पर थपकी लगाते हुए बोली-
“आज रात को अपनी सास को लेकर आ जाना । मेरी पुरी बदन मेँ दर्द हो रहा है । तुम दोनोँ मिलकर मसाज कर देना ।”
“जी मैडम ।” शीतल अपनी गर्दन हिला कर बोली और जल्द ही अपनी सास को ये बात बताने चली गई ।
उस रात समीरा अपने कमरे मेँ सारा इंतजाम करके एकदम नंगी ही दोनोँ का इंतजार करने लगी । कुछ देर बाद मालती अकेली नाइटी पहने आई और सोफे पे चिंतित बैठ गई । उसे चिँतित बैठी देख समीरा ने विस्की की बॉटल टेबल पे रखी तो मालती ने फौरन ही उसको उठा के सोफे के पीछे रख दिया और शीतल को फोन किया तो व भी आ गयी ।
फिर समीरा ने एक ग्लास मेँ विस्की डाली तो मालती ने विस्की का ग्लास समीरा के हाथ से ले लिया और एक घूंट शीतल को भी पीला दिया जिसे शीतल ना ना करते पी गयी और इसी तरह से मालती ने तकरीबन आधा ग्लास अपनी बहू को भी पीला दिया । अब शीतल को भी मज़ा आने लगा था और थोड़ी सी ही शराब से उसको नशा चढ़ने लगा था । पहली बार विस्की पीने की वजह से शीतल जल्दी ही आउट भी हो गयी थी । उसका बदन शराब की और चूत की गर्मी से जलने लगा था ।
उसने मालती के हाथ पकड़ के उठाया और नशे मे झूमते हुए बोली के मम्मी मुझे तो बहुत ही गर्मी लग रही है और अपनी नाइटी के बटन खोलने लगी और देखते ही देखते उतार भी दिया । उसने पैँटी और ब्रा नहीँ पहनी थी और यही समीरा और मालती ने प्लान भी किया हुआ था पहले से ।
नंगी शीतल ने मालती से पूछा-
“मम्मी आपको गर्मी नहीँ लग रही है ?”
“अरे बहू, मैं तो कब से अपने बदन की आग मेँ जल रही हूं ।”
“तो आप भी अपने कपड़े निकाल दो ना “
“तुम ही निकाल दो बहु ।” मालती ने मुस्कराते हुए बोली ।
शीतल ने हाथ बढा के अपनी सास की नाइटी को भी उतार दी और अंदर से मालती भी नंगी थी । उधर समीरा कबसे हाथ मेँ एक विस्की ग्लास लिए पीये जा रही थी और सास-बहू के कारनामोँ को देख कर अपनी लंड सहला रही थी । और अब समीरा के सामने दो-दो नंगे वासना की आग मेँ जलते बदन खड़े थे । जिन्हेँ देख के समीरा की मूसल लंड भी लोहे जैसा सख़्त हो गया । अब व दो-दो बुर की गर्मी को शांत करने के लिए तय्यार था ।
कमरे मेँ धीमी लाइट जल रही थी, कमरे का माहौल बहुत ही रोमांटिक हो गया था । मालती उठते-उठते एक ग्लास भर के शराब और पी गयी थी । शीतल ने जब समीरा को लंड सहलाते हुए देखी तो लड़खड़ाती हुई करीब आ गयी । और समीरा की हिलते हुए मूसल लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और चूमने लगी और देखते ही देखते अपने मूंह मेँ डाल के चूसने लगी । थोड़ी देर उसको लंड चूसने दिया उसके बाद समीरा ने उसको बगल से पकड़ के उठाया और बेड पे लिटा दिया । समीरा उसके टांगोँ के बीच मे बैठ गयी ।
अपने सामने दो-दो नंगे बदन देख के समीरा तो पहले ही जोश मेँ आ चुकी थी । फिर शीतल की छोटी सी चूत को देख के समीरा एक दम से पागल ही हो गयी और झुक के उसकी चूत को चूमने और चाटने लगी । शीतल ने समीरा की बालोँ को पकड़ के अपनी चूत मेँ दबाने लगी ।
मालती खड़ी-खड़ी यह सब देख रही थी और अपनी टांगोँ को फैलाए हुए अपनी बुर को अपने ही हाथोँ से सहलाने लगी थी । साथ मे शराब भी पीये जा रही थी ।
समीरा ने शीतल की बुर को पूरे मूंह मेँ भर के दांतो से काटा तो उसका मूह ऊऊऊ…ईईईई..,स्स्स्स् की आवाज़ के साथ खुल गया तो मालती ने ग्लास मेँ बची हुई शराब को अपनी बहू के मूंह मेँ डाल दिया । जिससे शीतल बडी आराम से पी गयी ।
समीरा अपनी जगह से उठ कर शीतल के ऊपर लेट गयी और उसकी चुचिओँ को चूसने लगी । समीरा की लंड उसकी चूत के दरार के बीच छेद मेँ अटकी हुई थी । तभी मालती पिछे से आकर समीरा की उभरी गांड को सहलाते हुए उसकी लंड को शीतल की बुर मेँ भिडा कर ज़ोर से दबायी । समीरा की मूसल लंड पूरा का पूरा शीतल की गीली और टाइट चूत के अंदर जड़ तक उतर गया । फिर से शीतल की मूंह से सिसकारी छुट गयी तो समीरा ने मालती से बोली-
“मालती, तु शीतल की मूंह पे बैठ जा और उसको अपनी बुर का जूस पिला ।”
तो मालती बेड के ऊपर आ गयी और समीरा की तरफ मुंह करके शीतल की मूंह के ऊपर बैठ गयी और उसके मूंह मेँ अपनी चूत को रगड़ने लगी । शीतल अपनी सास की चूत को चाटने लगी जिसमे से जूस निकल रहा था ।
समीरा कराहती हुई शीतल की बुर को चोद रही थी और साथ मेँ मालती की होंठोँ को अपने मूंह मेँ ले के चूस रही थी । मालती भी मस्ती मेँ समीरा की चुचियोँ को मसल रही थी और चूत से अपनी बहू को चोद रही थी । देखते ही देखते मालती की बदन कांपने लगा और व अपनी बहू के मूंह मेँ झड़ने लगी । जिसे शीतल जोश मेँ पी गयी और चाट-चाट कर सास की चूत को सॉफ कर दिया ।
इसी बीच समीरा गांड उछालती हुई शीतल की कसी बुर मेँ लंड अंदर-बाहर करके चोद रही थी । शीतल की चूत मेँ से लगातार जूस निकल रहा था जिससे समीरा की लंड आसानी से बुर मेँ जा रहा था । और फिर समीरा की धक्के तेज़ होते चले गये । अचानक शीतल की बदन कांपने लगा और उसने समीरा की उभरी गांड के उपर अपने पैर ज़ोर से लपेट लिए और चिल्लाते हुए झड़ने लगी ।
जैसे ही शीतल झड़ने लगी उसकी चूत बहुत टाइट हो गयी और उसकी चूत के मसल्स समीरा की मूसल लंड को निचोड़ने लगी । समीरा भी अपनी लंड को जड तक पेल दी और उसकी गरम चूत के अंदर ही अपनी सारी गरम-गरम वीर्य उडेल दिया । फिर शीतल की चुचियोँ पर अपनी चुचियां रगडते हुए ढेर हो गयी । इस बीच मालती की चूत से पानी निकल गया था और व भी फिर से खल्लास हो चुकी थी, गहरी सांसें लेती हुई व शीतल के ऊपर से लुढ़क के बगल मेँ लेट गयी ।
तीनोँ एक-दुसरे से लपेटे हांफ रहे थे । सबकी सांसेँ तेजी से चल रही थी । दोनोँ सास-बहू अपनी शीमेल मैडम की लंड से चोदाई का मजा लिया । आधा घंटे तक पडे रहने के बाद तीनोँ उठे और ग्लास मेँ विस्की निकल के फिर से पी गये और बिस्तर पर नंगे ही सो गये।
धन्यवाद।